आज तुने
आज तुने दिया जब अपना हाथ मेरी हाथो मे
मेरी सांसे अटक गई सांसो मे,
न जाने कौन - सा जादू था तेरी आँखो मे
मै लुट गया चन्द मुलाकातो मे,
तेरा बार बार मुस्कुराकर मुझसे नज़रे मिलाना
के मुझे टच कर गया तेरा पलके झुकाना,
वो बातो बातो मे तेरा हर बार शरमाना
मुझे करता गया दिवाना और दिवाना,
तेरी गालो पे जो काला तिल है
उसी की खातिर मुश्किल मे मेरा दिल है,
जी करता है हरदम तेरी
आंखो मे देखता रहूँ
ये हिमालय की लगती कोई गहरी झील हैं।
-दीपक
कुमार
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