लहरों सा मन मेरा बह चला तेरी ओर।
लहरों सा मन मेरा बह चला तेरी ओर.. आहट तूने कैसी की ये, खींचा जाये ये बिन डोर, ऐ वो सजना थी मैं तन्हा, लाया ये तूने कैसा मोड़, भागी मैं भागी तेरी ओर... लहरों सा मन मेरा बह चला तेरी ओर। बा...
जीवन के हर पहलू को शब्दों में बयाँ किया जाए तो बात ही निराली है। कविता, गीत और शायरी के माध्यम से अगर जिंदगी के हर लम्हे को गूँथ दिया जाए तो एक ऐसी माला तैयार होती है जिसकी महक निरंतर फैलती ही जाती है और जो कभी पुरानी नही होती। कुछ ऐसे ही पलों को बयां करती है ये ब्लॉग, जिससे प्रेम रस परस्पर टपकता है।