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Showing posts from November, 2017

प्रिये क्या अपनी प्रेमगाथा का अब यहीँ अंत हो जाएगा।

प्रिय, क्या अपनी प्रेमगाथा का अब यहीँ अंत हो जाएगा, जो कुछ पाया था मैंने क्या आज सब यहीं खत्म हो जाएगा, चित्रहीन सा अब मेरा सबकुछ, विकल्पों के वारों से, क्या हृदय का अब यहीं खंड ...

लहरों सा मन मेरा बह चला तेरी ओर।

लहरों सा मन मेरा बह चला तेरी ओर.. आहट तूने कैसी की ये, खींचा जाये ये बिन डोर, ऐ वो सजना थी मैं तन्हा, लाया ये तूने कैसा मोड़, भागी मैं भागी तेरी ओर... लहरों सा मन मेरा बह चला तेरी ओर। बा...