तु मय बरसाती है।
मदिरा सी मधुता तब ये छलकाती है नैन तेरे जब गोरी काज़ल से लिपट जाती है, मन पापी मचल उठता है पीने को, जब आंखों से तू मय बरसाती है। मै पुलकित हो उठता हूं तुझे पाकर, ...
जीवन के हर पहलू को शब्दों में बयाँ किया जाए तो बात ही निराली है। कविता, गीत और शायरी के माध्यम से अगर जिंदगी के हर लम्हे को गूँथ दिया जाए तो एक ऐसी माला तैयार होती है जिसकी महक निरंतर फैलती ही जाती है और जो कभी पुरानी नही होती। कुछ ऐसे ही पलों को बयां करती है ये ब्लॉग, जिससे प्रेम रस परस्पर टपकता है।