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Showing posts from 2018

रंगहीन सा वो इश्क़ मेरा

रंगहीन सा वो इश्क़ मेरा, जिसे रंगना बड़ा ही मुश्किल है, कहा जाऊं तू ही बता,हर तरफ तो तेरी महफ़िल है, एक तेरी आरज़ू में मर जाऊं तो शायद ये कम होगा, तेरे इंतज़ार में खड़ा आज भी तेरा बिस्मि...

इश्क़ की स्याही।

इश्क़ की स्याही अब फीकी पड़ने लगी, उनसे दूरियाँ भी इस क़दर बढ़ने लगी, ताउम्र जिसे आँखों मे भरता रहा मैं, बनके सावन अब वो बरसने लगी।                                               ...

मेरा अफ़साना कहती है

आब-ए-चश्म मेरा अफ़साना कहती है, पत्थर मार के ये दुनिया मुझको दीवाना कहती है।                                            -दीपक कुमार

जहाँ रोती है मेरी मोहब्बत।

जहाँ रोती है मेरी मोहब्बत, बेवफ़ा वो तेरा ठिकाना है, लिख रहा हूँ अश्कों से जो, ये मेरा फ़साना है।                          जहाँ तूने किये थे मुझसे सौ वादे,                       ...

अब जो आओगी तो फिर जाना नही।

सुनो, अब जो आओगी तो फ़िर जाना नही, जैसे पहले मेरा दिल दुखाया था फिर दुखाना नही। अभी तो मैं ठीक से संभल भी नही पाया हूँ, पकड़ के हाथ मेरा फिर गिराना नहीं। कम्बख़त तेरी ज़ुल्फ़ें जो मे...

यादों के कम्बल में

यादों के कम्बल में हैं उन्हें सीने से लगाये बैठे हैं, कुछ दर्द है जो आज भी हम छुपाये बैठे हैं, उस रात से इस रात तक बस इतना ही फासला है, कभी वो हमारे पास थी और आज, उनकी बातों को लब पे ...

दोस्त तुझे याद तो है ना।

घर से स्कूल तक पैदल जाना, और अतरंगी बातों पे खिलखिलाना, दोस्त तुझे याद तो है ना। वो बचपन का हसीन फ़साना, दोस्त तुझे याद तो है ना। जब क़दम हमारे स्कूल की सीढ़ियों पे पड़ते थे, नैन उस ल...

मंज़िले तुमने तय की

मंज़िले तुमने तय की, मग़र रास्ते सारे अंजान थे, कुछ सिमटी हुई यादें ही, तुम्हारे पहचान थे। पल में तुमने अपना कारवां बदल लिया, मगर आगे ज़िंदगी के जंग-ए-मैदान थे, और मुसीबतों से लगे ...