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तु मय बरसाती है।

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मदिरा सी मधुता तब ये छलकाती है नैन तेरे जब गोरी काज़ल से लिपट जाती है, मन पापी मचल उठता है पीने को, जब आंखों से तू मय बरसाती है।                  मै पुलकित हो उठता हूं तुझे पाकर,   ...