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हर लम्हा हर बातें तेरी मुझको

हर लम्हा हर बातें तेरी मुझको सताती है, दिन बीते या ना बीते पर रातें मुझको जगाती है। तेरा मिलके वो बिछड़ना मेरी पलकों पे छा जाती है, तुझे भूलूँ तो भी कैसे मेरी सांसे थम सी जाती ह...

इश्क़ की स्याही।

इश्क़ की स्याही अब फीकी पड़ने लगी, उनसे दूरियाँ भी इस क़दर बढ़ने लगी, ताउम्र जिसे आँखों मे भरता रहा मैं, बनके सावन अब वो बरसने लगी।                                               ...