कृष्ण - कमल सा मै तुझको तब पाता हूँ
विकट उलझनो से उलझा जब मै बस मे आता हूँ कृष्ण - कमल सा मै तुझको तब पाता हूँ, तु भावनाओ की एक सागर सी लगती है और मन जल - तरंग सा पाता हूँ। यूँ तो उस बस मे भीड बहुत होती है, कभी क्रन्द्न से स्वर होते है और कभी खामोशी होती है, कभी तेज़ हवाये गालो को छू जाती...