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सितमगर ज़माने ने

सितमगर ज़माने ने सताया न होता, मुझको तेरी याद आया न होता।                                मै तो तन्हा था कब से,                                तेरी यादों ने रुलाया न होता। न लिख...

दिल अक्सर तुझसे मिलने को रोता है।

न जाने क्यों ये बार बार होता है, दिल अक्सर तुझसे मिलने को रोता है, जब तु नज़रों से ओझल हो जाती हैं, तब ये चुपके से आहें भरता हैं।                                   जुदाई तुझसे एक प...

तुझे अपनी तहरीर बना लूँ

ये जो तेरी अदाये है इन्हें अपनी तहरीर बना लूँ। दे के लफ्ज़ तुझे एहसासों के, अपनी ज़ागीर बना लूँ।                           मुक़म्मल नही जो जहाँ में किसी को,                     ...

दिल आज उदास बहुत है।

ये दिल आज उदास बहुत है, मुझे आती किसी की याद बहुत है।                   ऐ बादल तू फिर कभी बरस लेना,                   आज नयन बरसात बहुत है। कब तक दबाये रखु अपने एहसासों को, आज लिख...

रुका रुका सा वक्त था मेरा

रुका रुका सा वक्त था मेरा तुने आकर इसे बहकाया है, इस बेचैन मन की दुनिया मे एक नया एहसास जगाया है।                            तु भी अंजान थी और मै भी बेगाना था                            दोनो थे बेखबर ये कैसा अफसाना था,                            लोगों मे चर्चा ये शायद पुराना था                            के झगड्ने के बहाने हमे तो पास आना था।                    ...

मोहब्बत की चिंगारी

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मोहब्बत की चिंगारी आज भडक जाने दो दिल की बात आज लब पे आ जाने दो,                                  नज़रे को मुझसे चुराओ नही सनम                                  आज नज़र से नज़र को मिल जाने दो, तुम दूर हो मुझसे तो क्या हुआ दिल से दिल की तार जुड जाने दो,                             कब से अपनी अरमानो को छिपाये बैठा हूँ,                             आज रोको नही मुझे कह जाने दो, बरसो से तो मै पीछे रहा हूँ कम से कम आज तो आगे आने दो,                              अब कुछ कहो तो दिल को चैन मिले                              अप...

छायी है अम्बर पे

छायी है अम्बर पे वही सावन की बदली मन मे है कुछ धून्धली सी यादे उछ्ली, फिर वही पहला सा नज़ारा है हम तुफान मे घिरे है और दूर किनारा है, पग पग पे है ज्ज़्बा हिलोरा मारे पर रोके है मुझे धडकनो के इशारे, है इच्छा प्रबल के मै जीतुंगा कल दर्पण है जैसे मेरे जीवन का हर पल, आज फिर से शायद वही ज़ख्म है उभरा कैसे चुनू ये अपने ही दिल का है टुकडा, जो बीत गयी वो कहानी है यादे ही तो बस उसकी निशानी है।                                      -   दीपक कुमार